मार्गशीर्ष मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को दत्तात्रेय जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष ये तिथि 22 दिसंबर को है। पंडित दीपक पांडे से जानें क्या है इस दिन का अर्थ।

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कौन हैं श्री दत्तात्रेय

महा योगेश्वर श्री दत्तात्रेय को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है। ये महर्षि अत्रि और सती अनुसुइया की पुत्र थे आैर इनका अवतरण मार्गशीर्ष मास की पूर्णिमा के दिन प्रदोष काल में हुआ था। इस वर्ष पूर्णिमा मार्गशीर्ष पूर्णिमा पर दत्तात्रेय जयंती आैर अन्नपूर्णा जयंती मनार्इ जायेगी जो 22 दिसंबर 2018 को पड़ रही है। कहते हैं कि परम भक्त वत्सल श्री दत्तात्रेय भक्तों के स्मरण मात्र पर तुरंत भक्त के पास पहुंच जाते थे इसलिए इन्हें स्मृति गामी कहा जाता है।

दत्तात्रेय की जन्म कथा

भगवान विष्णु के अवतार दत्तात्रेय के जन्म के बारे में कथा के अनुसार सती अनुसूया की कोख से ब्रह्मा जी के अंश से चंद्रमा, विष्णु जी के अंश से दत्तात्रेय और शिव जी के अंश से दुर्वासा मुनि ने जन्म लिया था। कहते हैं कि देवी लक्ष्मी, पार्वती आैर सरस्वती जी अपनी सतीत्व पर अत्यंत अभिमान था। एक बार देव मुनि नारद ने उन्हें बताया कि वास्तव में अनसूया सबसे महान सती हैं। नारद जी की बात तीनों को नागवार गुजरी और उन्होंने हट करके अनुसुइया की परीक्षा लेने के लिए अपने पतियों ब्रह्मा, विष्णु आैर महेश को भेजा। ये तीनों देव अत्रि आश्रम पहुंचे और सती अनुसूया से भोजन करवाने के लिए कहा। जब वे भोजन परोसने लगीं तो साधु रूपी देवों ने कहा भोजन की शुद्घता के लिए निर्वस्त्र होकर भोजन परोसेंगी तो ही वे उसे ग्रहण करेंगे। इस पर माता अनुसूया ने अपने सतीत्व के बल पर यह पता लगाकर कि यह तीनों कौन हैं और क्यों आए हैं उन्हें नन्हें बालक बना दिया। इसके पश्चात मां स्वरूप उनकी शर्तों पर उदर पूर्ति करवार्इ। तत्पश्चात तीनों बालक आश्रम में ही आनंद से रहने लगे। जब कई दिनों तक त्रिदेव नहीं लौटे तो तीनों देवियां चिंतित हुईं।  उन्होंने महर्षि अत्रि के आश्रम पहुंच सती अनुसूया को पूरी बात बता कर उनसे क्षमा मांगी। तब सती अनुसूया ने कहा कि तीनों बालकों के रहने से उन्हें संतान की कमी नहीं अनुभव होती है इसलिए वे चाहती हैं कि वे उनके गर्भ से जन्म लें। तीनो देवियों ने उन्हें ऐसा ही होने का वरदान दिया आैर प्रसन्न होकर सती अनसूया ने तीनों को उनके वास्तविक रूप में ला दिया। समय आने पर सती अनुसूया की कोख से ब्रह्माजी के रूप में चंद्रमा, विष्णु के रूप में दत्तात्रेय और शिव जी रूप में दुर्वासा ऋषी ने जन्म लिया। विष्णु के अवतार दत्तात्रेय बड़े ही शांत स्वभाव के हैं उनका ध्यान आरंभ से ही ब्रह्मांड के कल्याण आैर सभी जीवों को परमात्मा का अंश मानने में रहा। वे पर्वत की गुफा में रहते थे।  

Posted By: Molly Seth