एनीमिया खून की कमी से होने वाली बीमारी है। इस वीडियो में हम आपको बताएंगे की घर बैठे आप कैसे एनीमिया जैसे घातक बीमारी का इलाज आयुर्वेदिक तरीके से कर सकते हैं।

0
40

एनीमिया खून की कमी से होने वाली बीमारी है जिसके आयुर्वेदिक उपचार संभव हैं। लेकिन इसके आयुर्वेदिक उपचार बताने से पहले यह जानना बेहद आवश्यक है कि आखिर ये बीमारी कैसे होती है? और इसके लक्षण क्या हैं? दरअसल शरीर में फोलिक एसिड, आयरन व विटामिन-बी12 की कमी से एनीमिया रोग होता है। इस रोग में शरीर से रेड ब्लनड सेल्स का लेवेल सामान्य से कम हो जाता है। एनीमिया का सबसे बड़ा कारण है, शरीर में खून की कमी होना। एनीमिया के कारण रोगी हमेशा थका हुआ महसूस करता है जिससे कार्यक्षमता प्रभावित होती है। बढ़ते बच्चों, स्तनपान कराने वाली महिलाओं व बीमार व्यक्तियों में एनीमिया का खतरा ज्यादा होता है। इसके लक्षण हैं कमजोरी और थकावट महसूस होना, चक्कर आना, लेट के उठने पर आँखों के सामने अंधेरा छा जाना, सिर दर्द रहना, हृदय की धड़कन तेज या असामान्य होना, त्वचा व नाखूनों का पीला होना, हाथों और पैरों का ठंडा होना, आंखें पीली हो जाना, सांस फूलना, छाती में दर्द होना, महिलाओं में मासिक धर्म कम होना। इस वीडियो में हम आपको बताएंगे की घर बैठे आप कैसे एनीमिया जैसे घातक बीमारी का इलाज आयुर्वेदिक तरीके से कर सकते हैं। देखें वीडियो

एनीमिया के आयुर्वेदिक उपचार

1. हल्दी का उपयोग

1 चम्मच हल्दी को शहद के साथ में दिन में 2 बार या सुबह दही के साथ ले सकते हैं।

2. आंवले का उपयोग

आंवले का चूर्ण 1 से 2 ग्राम सुबह-शाम शहद के साथ ले सकते हैं।

आंवले का जूस 1 से 2 चम्मच दिन में दो बार ले सकते हैं ।

3. घृत (घी) का उपयोग

शतावरी घृत, त्रिफला घृत या गाय के घृत को सुबह-शाम खाली पेट गुनगुने दूध या पानी के साथ लें।

4. भस्म का प्रयोग

कान्त लौह भस्म 1 ग्राम, त्रिकटु चूर्ण 2 ग्राम, विडंग चूर्ण 2 ग्राम को शहद के साथ दिन में 2 बार ले सकते हैं।

शुंठी चूर्ण 1 से 2 ग्राम और 1 ग्राम लौह भस्म को शदह के साथ दिन में दो बार ले सकते हैं।

1 ग्राम मंडोर भस्म को द्राक्षारिष्ट और लोहासव के साथ दिन में 2 बार खाना खाने के बाद प्रयोग कर सकते हैं।

5. चूर्ण बनाने की विधि और प्रयोग

इलायची, जीरा, भूम्यामलकी और मिश्री को बराबर मात्रा में मिलकर चूर्ण बनाएं।

6. जूस बनाने की विधि और प्रयोग

एलोवेरा और प्याज के जूस को 3:1 के रेश्यो में 1 से 2 चम्मच दिन में 2 बार ले सकते हैं।

अनार और चुकंदर के रस को आधा-आधा कप मिलाकर दिन में 2 बार लें।

7. कब्ज़ से ऐसे बचें

गुलकंद या त्रिफला चूर्ण को 1 चम्मच रात को सोते समय गुनगुने पानी से लें।

8. पंचकर्मा प्रक्रिया

वमन, विरेचन, वस्ति, अभ्यंगम का कर सकते हैं प्रयोग।

क्या करें

हल्का व्यायाम करें, गुनगुनी धुप लें।

किसी कारण रक्त-रिसाव ज़्यादा हो तो चेकअप कराएं

खाने में इन चीज़ों का करें इस्तेमाल

अदरक, लहसुन और गुड़ का प्रयोग ज़्यादा करें।

ड्राइ फ्रूट्स को पानी में भिगो कर खाएं।

योगासन और प्रायाणाम करें

शवासन, सर्वांगासन, पश्चिमोत्तासन करें।

सूर्य भेदना प्राणायाम और अनुलोम-विलोम प्रायाणाम करें।

क्या न करें

टी, कॉफ़ी, कोका, मैदा आदि का इस्तेमाल न करें।

अति-जलपान से बचें ।

 


Posted By: Priyanka Singh