सर्दी में स्मॉग की वजह से सांस की तकलीफ आम बात हो गई है। बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इसका शिकार हो रहे हैं। तो आज इससे राहत पाने के आयुर्वेदिक उपायों के बारे में जानेंगे।

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दिनों दिन बढ़ता वायु प्रदूषण हमारे लिए जानलेवा साबित हो रहा है। वाहनों और कारखानों से निकलने वाले धुएं और सर्दी के दिन में स्मॉग के कारण सांस की तकलीफ आम बात हो गई है। ऐसे में बच्चों और बुजुर्गों के सांस संबंधी बीमारियों से प्रभावित होने की अधिक आशंका रहती है।

वायु प्रदूषण और स्मॉग की समस्या के कारण हमें सिरदर्द का होना, आलस का होना, चिड़चिड़ापन, भूख का न लगना आदि लक्षण उत्पन्न हो जाते हैं। इसके अलावा इस समय अस्थमा के रोगियों की संख्या भी बढ़ जाती है।

ऐसे में हम आज बात करेंगे वायु प्रदूषण और स्मॉग से राहत पाने के लिए कुछ आसान आयुर्वेदिक उपायों के बारे में।
1. एयर पॉल्यूशन और स्मॉग से बचने के लिए हमें अपने घरों में ऐसे प्लांट लगाने चाहिए जो कि हवा को शुद्ध करें। जैसे कि सिंगोनियम, स्नेक प्लांट, स्पाइडर प्लांट, ड्रैगन ट्री, बम्बू पाम, तुलसी और एलोवेरा प्लांट।
2. इसके अलावा हम अपने घरों की खिड़की या दरवाज़ों पर खस के टाट या खस-खस के परदे भी लगा सकते हैं।
3. धूपन का भी प्रयोग कर सकते हैं। धूपन के लिए जो हम आयुर्वेदिक औषिधियां प्रयोग करेंगे उसमें हैं- गुग्गुल, राल, देवदारु, अतिविषा, नागरमोथा, हरीतकी, हरिद्रा, ऐला, तेजपत्र, सफ़ेद सरसों, राई, कूट, लाख, चन्दन, नीम आदि का प्रयोग कर सकते हैं।

4. इसमें हम हवन भी कर सकते हैं। हवन के लिए हम जो लकड़ियां इस्तेमाल करेंगे, उसमें हम आम, पीपल, बरगद और चंदन की लकड़ी का इस्तेमाल कर सकते हैं।
5. हम अलग-अलग तरह के फल, घी, मधु, गुड़, कपूर, लौन्ग, जटामांसी और ब्राह्मी आदि का प्रयोग यज्ञ के लिए करते हैं। यज्ञ के ऊपर बहुत सारे वैज्ञानिक शोध हुए हैं, इसमें पाया गया है कि यज्ञ करने के एक घंटे के बाद में 90 % से ज़्यादा जीवाणु नष्ट हो जाते हैं और हवा की गुणवत्ता में भी सुधार होता है।
6. इसमें हम नस्यम का प्रयोग भी कर सकते हैं। नस्यम की लिए गाय की घी की दो-दो बूंद हम एक नथुने में डालेंगे, जिससे कि जो सस्पेंडेड पार्टिकल हैं वो भी निकल जाएंगे और चिकनापन बढ़ जाएगा।

 

Posted By: Priyanka Singh